उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर विवाद: पावर कॉर्पोरेशन पर लटकी ‘अवमानना’ की तलवार!

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर केंद्रीय नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगा है। उपभोक्ता परिषद ने लखनऊ में नियामक आयोग के समक्ष पावर कॉर्पोरेशन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर हड़कंप मचा दिया है।

क्या है पूरा मामला? उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि प्रदेश में नए बिजली कनेक्शनों को लेकर पावर कॉर्पोरेशन मनमानी कर रहा है। याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि नई अधिसूचना जारी होने के बावजूद, विभाग अभी भी नए कनेक्शनों के साथ अनिवार्य रूप से ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’ ही थोप रहा है।

कानून का सीधा उल्लंघन? उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से अवैध करार दिया है। उनके अनुसार:

  • 1 अप्रैल 2026 को जारी हुई नई अधिसूचना के बाद, स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाने वाली पुरानी व्यवस्था स्वतः समाप्त हो गई थी।
  • बावजूद इसके, पावर कॉर्पोरेशन अभी भी पुरानी और निष्प्रभावी अधिसूचना का हवाला देकर उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर लेने के लिए मजबूर कर रहा है।
  • यह प्रक्रिया केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के निर्देशों और विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का सीधा उल्लंघन है।

उपभोक्ताओं को है अधिकार! नियमों के तहत, बिजली उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट अधिकार है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार ‘प्रीपेड’ या ‘पोस्टपेड’ मीटर में से किसी एक का चुनाव कर सकें। लेकिन परिषद का आरोप है कि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के इस बुनियादी अधिकार का भी हनन कर रहे हैं।

आगे क्या होगा? उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी निगाहें नियामक आयोग पर टिकी हैं कि क्या इस याचिका के बाद यूपी पावर कॉर्पोरेशन अपनी नीति में बदलाव करेगा या फिर उपभोक्ताओं का यह संघर्ष अभी और लंबा खिंचेगा।

फोटो काल्पनिक

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